फेकोइमल्सीफिकेशन: प्रक्रिया, फायदे और जोखिम – Phacoemulsification: Procedure, Benefits And Risks In Hindi

Phacoemulsification : Procedure and Benefits of It

फेकोइमल्सीफिकेशन क्या है – What Is Phacoemulsification In Hindi

What is Phacoemulsification?फेकोइमल्सीफिकेशन एक प्रकार की मोतियाबिंद सर्जरी है, जो आंख से धुंधले लेंस को तोड़ने और हटाने के लिए अल्ट्रासाउंड तरंगों का उपयोग करती है। यह सर्जरी अक्सर आउट पेशेंट प्रक्रिया के आधार पर की जाती है। इसका मतलब है कि आपको रात भर अस्पताल में नहीं रहना पड़ेगा। प्रक्रिया के दौरान सर्जन आपकी आंख में छोटा चीरा लगाकर छोटी प्रॉब डालते हैं। यह प्रॉब अल्ट्रासाउंड तरंगें पैदा करती है, जो लेंस को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ती है और फिर इसे सक्शन किया जाता है। इस पूरी सर्जरी में आमतौर पर 30 मिनट से कम समय लगता है।

सर्जरी के बाद आपको कुछ दिनों के लिए अपनी आंखों पर प्रोटेक्टिवल शील्ड पहननी होती है। सूजन कम करने और उपचार को गति देने में मदद के लिए आपको आई ड्रॉप के उपयोग की जरूरत भी हो सकती है। ज्यादातर लोग इस सर्जरी से बिना किसी समस्या के ठीक हो जाते हैं और मोतियाबिंद के विकसित होने से पहले के मुकाबले ज्यादा बेहतर देख सकते हैं। यह सर्जिकल प्रक्रिया बहुत सुरक्षित है, लेकिन किसी भी सर्जरी की तरह इसमें कुछ जोखिम शामिल हैं। इनमें इंफेक्शन, खून बहना और आंखों को नुकसान शामिल है। ऐसे में सर्जन प्रक्रिया से पहले इन जोखिमों के बारे में आपके साथ चर्चा करते हैं। यह आपको सूचित फैसला लेने में मदद करता है कि फेकोइमल्सीफिकेशन आपके लिए सही है या नहीं।

फेकोइमल्सीफिकेशन को स्मॉल इंसीजन कैटरैक्ट सर्जरी भी कहते हैं। इस प्रकार की मोतियाबिंद सर्जरी में आंख से धुंधला लेंस तोड़ने और हटाने के लिए अल्ट्रासाउंड का उपयोग शामिल है। यह 98 प्रतिशत सफलता दर के साथ सबसे आम और सफल सर्जिकल प्रक्रिया है। हालांकि, इस सुरक्षित और सीधी सर्जरी में कुछ जोखिम शामिल हैं। इस ब्लॉग पोस्ट में हम फेकोइमल्सीफिकेशन की प्रक्रिया, फायदे और जोखिम सहित सभी जरूरी बातों पर चर्चा करेंगे।

फेकोइमल्सीफिकेशन की प्रक्रिया – Procedure OF Phacoemulsification In Hindi

Procedure of Phacoemulsificationआमतौर पर फेकोइमल्सीफिकेशन की प्रक्रिया लोकल एनेस्थीसिया के तहत की जाती है। इस दौरान सर्जन कॉर्निया में छोटा चीरा लगाते हैं और फिर प्राकृतिक लेंस को छोटे टुकड़ों में तोड़ने के लिए छोटी प्रॉब का उपयोग करते हैं। इसके बाद कृत्रिम लेंस को आंख में डाला जाता है और चीरा बंद कर दिया जाता है। पूरी प्रक्रिया, शुरू से अंत तक, आमतौर पर 30 मिनट से कम समय लेती है।

ज्यादातर लोग फेकोइमल्सीफिकेशन प्रक्रिया के दौरान बहुत कम असुविधा महसूस करने की रिपोर्ट करते हैं। जब स्थानीय एनेस्थीसिया पहली बार इंजेक्ट किया जाता है तो कुछ को थोड़ी चुभने वाली सनसनी का अनुभव हो सकता है। वास्तविक प्रक्रिया के दौरान कुछ हल्की असुविधा भी हो सकती है, लेकिन इसे आमतौर पर दवा से नियंत्रित किया जा सकता है। पूरी प्रक्रिया में, आंख अधिक से अधिक कुछ मिनटों के लिए ही खुली रहती है।

फेकोइमल्सीफिकेशन प्रक्रिया के बाद, आंख को एक पैच या शील्ड से ढक दिया जाएगा। आंख को सुरक्षित रखना और उसे रगड़ने से बचाना महत्वपूर्ण है। पैच को 24 घंटे तक पहनना होगा। इस दौरान आंखों को रगड़ने या छूने से बचना जरूरी है। ज्यादातर लोग प्रक्रिया के एक या दो दिन के अंदर अपनी सामान्य गतिविधियों को फिर से शुरू कर सकते हैं। हालांकि, गतिविधि स्तर और फॉलो-अप अपॉइंटमेंट के संबंध में अपने सर्जन के निर्देशों का पालन करना जरूरी है।

सर्जरी के लिए सही उम्मीदवार – Right Candidate For Surgery In Hindi

Who is a Candidate for Phacoemulsification?फेकोइमल्सीफिकेशन एक प्रकार की मोतियाबिंद सर्जरी है जो आंख के धुंधले लेंस को तोड़ने और हटाने के लिए अल्ट्रासोनिक ऊर्जा का उपयोग करती है। यह आमतौर पर एक आउट पेशेंट के आधार पर किया जाता है, और रिकवरी आमतौर पर जल्दी होती है।

मोतियाबिंद वाले ज्यादातर लोग फेकोइमल्सीफिकेशन के लिए अच्छे उम्मीदवार हैं। इनमें निम्नलिखित स्थितियों वाले लोग शामिल हैं:

40 साल से ज्यादा उम्र है।

इस सर्जरी का उपयोग करने के लिए एक मानदंड यह है कि मोतियाबिंद पर्याप्त परिपक्व होना चाहिए। फेकोइमल्सीफिकेशन आमतौर पर बहुत कम उम्र के मोतियाबिंद वाले लोगों पर नहीं किया जाता है। कभी-कभी मोतियाबिंद बच्चों या युवा वयस्कों में बन सकता है। हालांकि, यह मोतियाबिंद आमतौर पर इस प्रकार की सर्जरी से हटाने के लिए पर्याप्त परिपक्व नहीं होते हैं।

मोतियाबिंद जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करता है।

यह तय करने में एक जरूरी कारक है कि क्या आप फेकोइमल्सीफिकेशन के लिए उम्मीदवार हैं, आपका मोतियाबिंद आपके जीवन की गुणवत्ता को कितना प्रभावित कर रहा है। यदि आपका मोतियाबिंद आपकी दृष्टि के साथ समस्याएं पैदा कर रहा है जिससे रोजमर्रा के कार्यों को करना मुश्किल हो जाता है, या यदि वे आपको परेशानी पैदा कर रहे हैं, तो आप इस सर्जरी के लिए एक अच्छे उम्मीदवार हो सकते हैं।

आंख की अन्य गंभीर स्थिति नहीं है।

फेकोइमल्सीफिकेशन आमतौर पर सिर्फ उन लोगों पर किया जाता है, जिनके पास कोई अन्य गंभीर आंख की स्थिति नहीं है। ऐसा इसलिए है क्योंकि अन्य नेत्र स्थितियां सर्जरी को जटिल बना सकती हैं और सफल परिणाम प्राप्त करना अधिक कठिन बना सकती हैं।

फेकोइमल्सीफिकेशन के फायदे – Benefits Of Phacoemulsification In Hindi

मोतियाबिंद सर्जरी के इस प्रकार को कीहोल या लेजर सर्जरी भी कहते हैं। यह संयुक्त राज्य अमेरिका में की जाने वाली सबसे आम सर्जिकल प्रक्रिया है। इस सर्जरी में सर्जन आंख में छोटा चीरा लगाकर पतली प्रॉब डालते हैं। इससे निकलने वाली अल्ट्रासाउंड तरंगें मोतियाबिंद को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ती हैं। फिर, सर्जन मोतियाबिंद के टुकड़ों को सक्शन कर देते हैं। पारंपरिक मोतियाबिंद सर्जरी के मुकाबले फेकोइमल्सीफिकेशन के कई फायदे हैं, जैसे:

  • छोटे चीरे: फेकोइमल्सीफिकेशन में सर्जन पारंपरिक मोतियाबिंद सर्जरी से छोटे चीरे लगाते हैं। इससे आंख को कम चोट और उपचार में कम समय लगता है। कभी-कभी इसे टांके लगाने की जरूरत के बिना किया जा सकता है।
  • कम जटिलताएं: सर्जरी में जटिलताओं का जोखिम पारंपरिक मोतियाबिंद सर्जरी से कम होता है। पारंपरिक मोतियाबिंद सर्जरी की जटिलताओं में रेटिनल डिटैचमेंट, इंफेक्शन और खून बहना शामिल है।
  • जल्द रिकवरी: पारंपरिक मोतियाबिंद सर्जरी के मुकाबले फेकोइमल्सीफिकेशन से जल्द रिकवरी होती है। इससे ज्यादातर लोग कुछ दिनों के अंदर सामान्य गतिविधियां शुरु करते हैं।
  • चश्मे की कम जरूरत: फेकोइमल्सीफिकेशन निकट दृष्टि, दूरदृष्टि और दृष्टिवैषम्य जैसी अपवर्तक त्रुटियों में सुधार करती है। इससे सर्जरी करवाने वाले लोगों को बाद में चश्मे या कॉन्टैक्ट लेंस की जरूरत नहीं होती है।
  • इंफेक्शन के जोखिम में कमी: छोटे चीरों का मतलब इंफेक्शन का कम जोखिम है, क्योंकि सर्जन को प्रक्रिया के दौरान आंख में ज्यादा दूर तक नहीं जाना पड़ता है।
  • खून बहने का कम जोखिम: सर्जरी में पारंपरिक मोतियाबिंद सर्जरी से कम ऊतक का नुकसान शामिल है। इससे सर्जरी के दौरान और बाद में खून बहने का जोखिम कम होता है।
  • बेहतर दृष्टि: यह सर्जरी आंख की प्राकृतिक संरचना को बचाती है, जिससे मरीजों को पारंपरिक मोतियाबिंद सर्जरी से ज्यादा बेहतर दृष्टि मिलती है। जर्नल ऑप्थल्मोलॉजी में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, फेकोइमल्सीफिकेशन वाले मरीजों की दृष्टि पारंपरिक मोतियाबिंद सर्जरी वालों से ज्यादा बेहतर थी।

फेकोइमल्सीफिकेशन की जटिलताएं – Complications Of Phacoemulsification In Hindi

Are There Any Complications Associated with Phacoemulsification? फेकोइमल्सीफिकेशन से जटिलताएं दुर्लभ हैं, लेकिन आमतौर पर इस सर्जरी को काफी सुरक्षित माना जाता है। हालांकि, किसी भी सर्जरी की तरह इसमें जटिलताओं का खतरा हमेशा बना रहता है। फेकोइमल्सीफिकेशन से होने वाली सबसे आम जटिलताएं हैं:

सूखी आंखें

फेकोइमल्सीफिकेशन के बाद लोगों को सूखी आंखों का अनुभव होने का एक मुख्य कारण यह है, कि आंखों के प्राकृतिक आंसू सामान्य रूप से उत्पन्न नहीं हो रहे हैं। ऐसा तब होता है, जब आंसू नलिकाएं बंद हो जाती हैं या जब पलकें ठीक से बंद नहीं होती हैं। कुछ मामलों में सूखी आंखें गंभीर चिकित्सा स्थिति के कारण भी हो सकती हैं।

अगर आप अपनी सर्जरी के बाद सूखी आंखों का अनुभव कर रहे हैं, तो डॉक्टर आपकी आंखों को लुब्रिकेट करने में मदद के लिए बनावटी आंसू या मलहम का उपयोग करने की सलाह दे सकते हैं। कुछ मामलों में वह आपके आंसुओं को बहुत जल्दी बहने से रोकने में मदद के लिए एक अस्थायी प्लग का उपयोग करने का सुझाव भी देते हैं।

मोतियाबिंद दोबारा होना

यह दुर्लभ है, लेकिन कुछ मामलों में मोतियाबिंद कभी-कभी फेकोइमल्सीफिकेशन सर्जरी के बाद वापस बढ़ सकता है। यह आमतौर पर तब होता है, जब लेंस के पुराने कैप्सूल के टुकड़े आंख में रह जाते हैं और फिर से बढ़ने लगते हैं। अगर ऐसा होता है, तो आपको नए मोतियाबिंद को हटाने के लिए एक अन्य सर्जरी कराने की जरूरत हो सकती है।

इंफेक्शन

किसी भी तरह की सर्जरी के बाद इंफेक्शन का खतरा हमेशा बना रहता है। इस जोखिम को कम करने में मदद के लिए डॉक्टर आपकी फेकोइमल्सीफिकेशन सर्जरी से पहले और बाद में लेने के लिए एंटीबायोटिक्स लिखते हैं। इसके अलावा इंफेक्शन के जोखिम को कम करने में मदद के लिए अपनी आंखों को साफ और बाहरी कण से बचाए रखना जरूरी है।

रेटिना अलग होना

कुछ मामलों में फेकोइमल्सीफिकेशन सर्जरी के बाद रेटिना अलग हो सकता है। यह आमतौर पर तब होता है, जब आंख पर्याप्त विट्रिटस ह्यूमर करने में असमर्थ होती है और रेटिना आंख के पीछे से दूर होने लगता है। अगर ऐसा होता है, तो आपको रेटिना दोबारा जोड़ने के लिए एक अन्य सर्जरी की जरूरत  हो सकती है।

निष्कर्ष – Conclusion In Hindi

फेकोइमल्सीफिकेशन एक प्रकार की सर्जरी है, जिसका उपयोग मोतियाबिंद के इलाज में किया जाता है। इस सर्जरी में अल्ट्रासोनिक तरंगों का उपयोग करके मोतियाबिंद को तोड़ना और फिर इसे आंख से बाहर निकालना शामिल है। फेकोइमल्सीफिकेशन एक अपेक्षाकृत तेज और दर्द रहित प्रक्रिया है, जो आमतौर पर एक आउट पेशेंट प्रक्रिया के आधार पर की जाती है। अगर आपको या आपके किसी जानकार को मोतियाबिंद है, तो जल्द से जल्द अपने डॉक्टर से बात करें। इससे आपको जानने में मदद मिल सकती है कि क्या फेकोइमल्सीफिकेशन आपके लिए सही है।

मोतियाबिंद सर्जरी एक सुरक्षित और दर्द रहित प्रक्रिया है। अगर आपके कोई सवाल या परेशानी है, तो आज ही आई मंत्रा के अनुभवी नेत्र रोग विशेषज्ञों से संपर्क करना सुनिश्चित करें। आई मंत्रा में हमारे पास अनुभवी आंखों के सर्जनों की एक टीम है, जो मोतियाबिंद सर्जरीमोतियाबिंद सर्जरी की कीमत, मोतियाबिंद सर्जरी के अलग-अलग प्रकारों के लिए मोतियाबिंद लेंस की कीमत- फेकोइमल्सीफिकेशनएमआईसीएस और फेम्टो लेजर मोतियाबिंद पर आपके किसी भी सवाल का जवाब देने में सक्षम है। ज्यादा जानकारी के लिए हमें +91-9711116605 पर कॉल या [email protected] पर ईमेल करें।